देहरादून, जेएनएन। बीते वर्षों में उत्तराखंड ने पलायन का दंश झेला। हाल के वर्षों में करीब तीन हजार गांव पूरी तरह मानवविहीन हो चुके थे। जबकि सैकड़ों गांवों की आबादी 50 फीसद रह गई। पलायन करने वाले करीब दो लाख लोग कोरोना काल में लौट आए हैं। जिन हालात में ये पलायन को विवश हुए थे, हालात अब भी वही हैं। कठिन भौगोलिक क्षेत्र होने के कारण पहाड़ी, पथरीली, उबड़खाबड़, परती जमीन, ऊपर से बुनियादी सुविधाओं का अभाव। किंतु अब इन्हीं प्रतिकूलताओं को मात देकर परती पर भविष्य उपजाने में जुट गए हैं। सफल होंगे, तो इनका पुरुषार्थ अमर हो जाएगा और आने वाली पीढ़ियां इनका गौरवगान करेंगी। तब कोई भी यहां से पलायन को बाध्य नहीं होगा। पढ़े और शेयर करें देहरादून से केदार दत्त और अल्मोड़ा से दीप सिंह बोरा की रिपोर्ट। जिन हालात में लाखों लोग उत्तराखंड से पलायन को विवश हुए थे, हालात अब भी वही हैं। कठिन भौगोलिक क्षेत्र होने के कारण पहाड़ी, पथरीली, परती जमीन और बुनियादी सुविधाओं का अभाव। किंतु अब इन्हीं प्रतिकूलताओं को मात देकर परती पर भविष्य उपजाने में जुट गए हैं। उत्तरकाशी जिले के थ...